हँसते रहना मुस्कुराते रहना - कुछ कविताएँ
1
अगर लड़ते हो दौलत के लिए
तो कसम है खुदा की तुम्हें,
मरना तो जमीं भी लेकर जाना
ऐ राम के पुछल्लों! लानत है तुम्हे, लानत है तुम्हे।
2
हँसते रहना मुस्कुराते रहना खिलते रहन कमल की तरह,
मेरी हर धड़कन हर साँसों में तुम होठों पे आना गजल की तरह।
3
कद बड़ा है न पद बड़ा है,
खुद से निगाह मिला सको-
वह पथ बड़ा है।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें