सारी हदें पार कर

 सारी हदें पार कर

सारी हदें पार कर सरहदों के पार से,
गोलियाँ चलाकर कहता है हमें प्यार दे। 
सिखा नहीं है जिसने मानव की तरह रहना,
सिखा रहा वो हमको अपनी हदों में रहना ।
संक्रमित नज़र है शैतान का असर है,
दिल नहीं है जिनके, दिमाग में जहर है।
अमन के रास्तों में काँटे बिछा-बिछाकर,
जहर हैं परोसते मिश्री मिला-मिलाकर।
खुदा का दिल दुखाकर खुदाई चाहते हैं,
मिर्ची खिलाकर हमको, मिठाई चाहते हैं।
ऐ मुर्दों! कहीं से दिल खरीद लो,
प्रीत और झनकार की हिन्दुस्तानियों से सीख लो।
तब अपने दिल के तार को, तुम्हारे दिल से हम मिलाएँगे;
तुमसे मुहब्बत का इतिहास हम रचाएँगे।
                           -डाॅ शिवनारायण सिंह 

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