लहरें उपन्यास अमरकांत
लहरें अमरकांत कृत 88 पृष्ठों का एक लघु उपन्यास है। इसे अमरकृतित्व प्रकाशन इलाहाबाद द्वारा सन् 2008 में प्रकाशित किया गया। इसमें एक अनपढ़, परित्यक्त स्त्री की व्यथा-कथा कही गई है , जो स्त्री के लिए लूला- लँगड़ा अथवा किसी भी प्रकार के पति का होना आवश्यक मानती है। मिलनी नामक सामाजिक संगठन कथा नायिका बच्ची देवी की मदद करती है, जिससे वह जागरूक बनती है।

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